आई.एच.आर.एम.एस
राजस्थान के विभिन्न राजकीय कर्मचारियों के सेवाभिलेख व प्रशासनिक प्रबंधन हेतु एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल

1. सामान्य परिचय:-
राज्य सरकार के अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के संर्वगों में कुल कार्यरत एवं सेवानिवृत लगभग 10 लाख कर्मचारी हैं, जिनका आधिकारिक एवं प्रशासनिक प्रबंधन एक नियमित चलने वाली किन्तु जटिल प्रक्रिया है। इसके कम्प्यूटराईज्ड समाधान हेतु भारत सरकार की सहायता से राज्य सरकार द्वारा लगभग 10 करोड़ रूपये की लागत से एनआईसी के माध्यम से आई.एच.आर.एम.एस. पोर्टल विकसित किया गया है।
वर्तमान में इस पोर्टल पर कर्मचारियों के डाटा को आई.एफ.एम.एस. से इम्पोर्ट किया जा चुका है और कतिपय अतिरिक्त सूचना को इसमें अलग से एन्टर किया जाना है। इस पोर्टल पर कुल कर्मचारियों का अद्यतन डाटा निम्नानुसार है -
क्र.सं. कर्मचारी वर्ग कुल संख्या
1. राजकीय 5,45,000
2. पंचायतीराज 1,50,000
3. स्वायत्त शासन विभाग 40,000
4. अन्य स्वायत्त विभाग 20,000
5. सेवानिवृत 3,50,000
योग 11,05,000
माननीय मुख्यमंत्री महोदया की बजट घोषणा 2015-16 में पंचायतीराज विभाग के कर्मचारियों को भी आई.एफ.एम.एस. के पे-मैनेजर से जोडने की घोषणा की गई, जिसके उपरान्त इन कर्मचारियों का डाटा भी आई.एच.आर.एम.एस. पोर्टल पर उपलब्ध होगा।
2. राजकीय कर्मचारियों के सेवाभिलेख व प्रशासनिक प्रबंधन संबंधी सामान्य कार्य : -
वस्तुतः राज्य कर्मचारियों के जो भी कार्य होते है, उन्हें मुख्यतः चार भागों में विभाजित किया जा सकता है-
2.1  वेतन-भत्ते का भुगतान कार्य, जिसमें ट्रेजरी और सम्बद्ध विभाग संलग्न होता है इसका पूरा प्रावधान आई.एफ.एम.एस. में विद्यमान है। वर्तमान में यह पोर्टल पूर्णतः सक्रिय है और इसका उपयोग पे-मैनेजर के रूप में सैलरी जारी किये जाने में हो रहा है। यह पोर्टल एनआईसी द्वारा विकसित है।
2.2  कर्मचारी के वेतन से राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि हेतु कटौती तथा उससे कर्मचारी का ऋण सम्बंधी लेन-देन का कार्य, जिसमें राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग संलग्न होता है इसका पूरा प्रावधान एस.आई.पी.एफ. पोर्टल में विद्यमान है। यह पोर्टल सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा विकसित है। वर्तमान में यह पोर्टल लगभग पूर्णतः तैयार है और 2012 के उपरान्त कर्मचारी का समस्त डाटा जिसमें राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि दोनों का अंकन है, लाईव किया जा चुका है। यह पोर्टल आई.एफ.एम.एस. से पूरी तरह से इन्टीग्रेटेड है और इसका ऑटो अपडेशन होता रहता है। 2012 से पूर्व का डाटा अभी वर्षवार तो एन्टर नहीं किया गया है, किन्तु उस कट ऑफ डेट तक की राशि क्लोजिंग अकाउंट के रूप में दर्ज है। पुराने लिगेसी डाटा को स्केन करने व एन्टर करने की कार्यवाही अगले चरण में की जायेगी।
2.3  सेवा व सेवा पुस्तिका संबंधी प्रशासनिक कार्य, जिसमें सम्बद्ध विभाग संलग्न होता है, जिसका प्रावधान आई.एच.आर.एम.एस. पोर्टल में विद्यमान है। सामान्यतः एक अधिकारी/कर्मचारी को नियुक्ति से सेवानिवृत्ति के मध्य निम्न कार्य संपादित करने होते हैं-
पदस्थापन, कार्यभार ग्रहण/हस्तांतरण,
सेवा पुस्तिका संधारण, सेवा सत्यापन
वरिष्ठता सूची निर्धारण/प्रकाशन,
पदोन्नति,
स्थानान्तरण,
प्रतिनियुक्ति,
अवकाश स्वीकृति,
प्रशिक्षण,
विभागीय जांच,
ए.सी.आर. पूर्ति,
वेतन, पे-फिक्सेशन, पे-स्लिप, वेतन संबंधी कटौती, जी.ए. 55, नो-ड्यूज, एल.पी.सी. आदि
इसमें समस्त कार्यो का प्रावधान आई.एच.आर.एम.एस. पोर्टल में चरणबद्ध रूप में किया जा रहा है।
2.4  पेंशन संबंधी कार्य, जिसमें सम्बद्ध विभाग तथा पेंशन विभाग संलग्न होता है। हर वर्ष लगभग 15000-20000 कर्मचारी सेवानिवृत होते हैं और पेंशन विभाग के पास इनके निस्तारण का बड़ा कार्य विद्यमान रहता है। वर्तमान में पेंशन जारी करने की प्रक्रिया आई.पी.एफ.एम.एस. पर उपलब्ध है, किंतु उसकी स्वीकृति संबंधी समस्त प्रक्रिया पेंशन कुलक भरने से जारी करने तक लगभग मैन्यूअल है। इसका दुष्परिणाम यह है कि अनावश्यक रूप में संबंधित विभाग द्वारा कई प्रतियों में डाटा लिखित रूप में भरना पड़ता है और पुनः पेंशन विभाग द्वारा उसे मैन्यूअल रूप में सत्यापित कर पेंशन जारी करना पड़ता है।
सामान्यतः पेंशन जारी करते समय पेंशन विभाग निम्न सूचनाएं पुनः प्राप्त करता है -
सर्विस बुक से जुड़ी समस्त सूचनाएं।
आई.एफ.एम.एस. पर दर्ज वेतन भुगतान संबंधी सूचनाएं।
विभिन्न संबंधित विभागों (मूल नियोक्ता विभाग, पदस्थापन कार्यालय, मोटर गैरेज, लाईब्रेरी आदि) से नोड्यूज़।
विभागीय जांच से संबंधित सूचना।
फोरेन/डेप्यूटेशन सेवावधि का पेंशन कंट्रीब्यूशन जमा कराने का विवरण।
राजकीय कर्मचारी के रूप में राजकीय विभागों से लिये गये ऋणों की सूचना।
कर्मचारी के परिवार का विवरण एवं पति-पत्नी का संयुक्त फोटो।
कर्मचारी के हस्ताक्षर, फिंगर प्रिंट, बैंक व अन्य अकाउन्ट डिटेल (यदि कर्मचारी मूल वेतन भुगतान से भिन्न खाते ट्रेजरी मेँ भुगतान चाहता है)।
उल्लेखनीय है कि पेंशन स्वीकृति की अधिकांश अनिवार्यताएं व औपचारिकताएं पूर्व तीन पोर्टल से पूरी हो जाती है, अतः जैसे ही आई.एच.आर.एम.एस. पोर्टल में डाटा एन्ट्री पूरी हो जाती है, आवश्यक सुविधा विकसित कर इसका पेंशन कार्यों में प्रयोग प्रारम्भ कर दिया जाना है, ताकि कर्मचारियों से संबंधित कार्यों की मिसिंग लिंक को जोड़ा जा सके।
वस्तुतः इन चारों कार्यों के अन्ततः एक ही डाटाबेस से पूर्णतः इन्टीग्रेटेड होने पर लगभग सारे कार्य एक-दूसरे से लिंक्ड हो जायेंगे और परस्पर सत्यापन की भी आवश्यकता नगण्य रह जायेगी। आई.एच.आर.एम.एस. इसी दिशा में एक पहल है।
इसी प्रकार सेवाभिलेख, पदोन्नति, अवकाश स्वीकृति, विभागीय जांच, वरिष्ठता सूची, वेतन कटौती आदि के प्रकारणों में, जहां अधिकांशतः स्वयं कार्मिक समयबद्ध या समुचित रूप में अपनी सेवा संबंधी स्थिति से अवगत नहीं हो पाता और न ही आधिकारिक स्तर पर ही इसकी समुचित माँनिटरिंग हो पाती है, वहां उनकी बेहतर माँनिटरिंग सुनिश्चित होगी और सरल रूप में सूचनाएं उपलब्ध होंगी।
3. आई.एच.आर.एम.एस. में राजकीय कर्मचारियों की सर्विस डाटा की एन्ट्री की प्रक्रिया:-
3.1  इसमें समस्त राजकीय कर्मचारियों का डाटा एन्ट्री का कार्य प्रगति पर है, यह डाटा एन्ट्री दो रूपों में की जा सकती है- विभागाध्यक्ष अथवा कार्यालयाध्यक्ष द्वारा तथा स्वयं अधिकारी या कर्मचारी द्वारा। किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा डाटा-प्रविष्टि कर अंतिम रूप से इसका सत्यापन विभागाध्यक्ष अथवा कार्यालयाध्यक्ष द्वारा किया जाना होगा। स्वयं अधिकारी या कर्मचारी द्वारा की गई डाटा एन्ट्री पोर्टल पर नीले रंग के फोन्ट में प्रदर्शित होगी, ताकि उसकी सरलता से पहचान की जा सके।
3.2  विभागाध्यक्ष अथवा कार्यालयाध्यक्ष के रूप में लॉग-इन करने हेतु अधिकारी को अपने पे-मैनेजर के यूजर नेम और पासवर्ड का उपयोग करना होगा।
3.3  व्यक्तिगत रूप में लॉग-इन करने हेतु कर्मचारी की पे-मैनेजर की आईडी (जो 16 डिजिट की होती है) के साथ डेट ऑफ बर्थ व एक अन्य विशिष्ट सूचना जैसे पैन नम्बर या नियुक्ति वर्ष को अनिवार्य होगा।
3.4  इस संबंध में डाटा प्रविष्टि की कार्यवाही व पोर्टल की प्रगति की माँनिटरिंग नोडल अधिकारियों हेतु उनके कार्यालय के निम्न चार स्तर रखे गये हैं-
राज्य स्तर
राज्य सरकार स्तर (सचिवगण)
मुख्यालय स्तर (विभागाध्यक्षगण)
संभाग/परिक्षेत्र स्तर स्तर (Division/Range/Zone)
जिला स्तर
उपजिला स्तर (Block/Tehsil/Sub Division/Circle)
इनमें स्पष्ट है कि नोडल अधिकारियों का स्तर उक्तानुसार प्रत्येक कार्यालय में होगा।
3.5  नोडल अधिकारियों के भी दो वर्ग रखे गये हैं - प्रशासनिक तथा तकनीकी। इस संबंध में विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के लिए पत्र लिखा जा चुका है। अतः जहां भी नोडल अधिकारी की सूचना अभी तक नहीं दी गई है, वहां उनके कार्यालयाध्यक्ष (जो पे-मैनेजर में डी.डी.ओ. हैं) को प्रशासनिक नोडल अधिकारी तथा राजस्थान सम्पर्क पर परिवाद निस्तारण हेतु नियुक्त सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित कार्मिक को तकनीकी नोडल अधिकारी बनाते हुए वेबसाईट पर सूचना डाल दी गई है। यदि कोई विभाग इसमें संशोधन चाहता है तो वह इस संबंध में अपनी सूचना देकर संशोधन करा लें।
3.6  कार्यालय स्तर पर डाटा एन्ट्री हेतु यदि लिपिक या सूचना प्रौद्योगिकी का कार्मिक नहीं है तो उपलब्ध कार्यालय व्यय से यह कार्य नियमानुसार आउटसोर्स कर करा सकते हैं।
4. आई.एच.आर.एम.एस. में राजकीय कर्मचारियों की सर्विस अनुसार पदनाम भरने की प्रक्रिया:-
वस्तुतः राजकीय सेवा में जहां विभागों एवं सम्बद्ध संस्थानों की संख्या 200 से अधिक हो, ग्रामस्तर से ऊपर के कार्यालयों की संख्या लगभग 15000 से अधिक हो और कार्यरत कर्मचारियों की संख्या 7 लाख से अधिक हो, वहां पदनामों का व्यवस्थित वर्गीकरण अत्यन्त कठिन कार्य है।
वर्तमान में आई.एच.आर.एम.एस. में पदनाम को मूलतः आई.एफ.एम.एस. से पोर्ट किया गया है, किन्तु आई.एफ.एम.एस. में प्रत्येक विभाग एवं कार्यालय द्वारा अलग-अलग प्रकार से प्रविष्टि किये जाने से पदनामों में अनेक प्रकार की त्रुटि रह गई है, जैसे - एक ही पद को कई अलग-अलग रूपों में लिखा जाना, संक्षिप्त अक्षरों का प्रयोग किया जाना, अनुवादों में या वर्तनी में त्रुटि रह जाना आदि।
इनके निदान हेतु आई.एच.आर.एम.एस पोर्टल पर पदनाम के संबंध में निम्नानुसार नीति अपनाई गई है-
4.1 पदनामों में ड्रॉपडाउन से चयन की सुविधा के लिए समस्त पदों को 5 वर्गों में रखा गया है,
अखिल भारतीय सेवा
राज्य स्तरीय सेवा
अधीनस्थ सेवा
मंत्रालयिक सेवा
चतुर्थ श्रेणी सेवा
पदनाम भरते समय सर्वप्रथम निर्धारित सेवा का पोर्टल पर रेडियो बटन से चयन कर लें।
वस्तुतः सामान्य नियम के अनुसार यह विभाजन कार्मिक के पे-बैंड व ग्रेड-पे से निर्धारित होना चाहिए किन्तु कई बार चयनित वेतनमान के समय (9-18-27, 10-20-30) कोई कार्मिक अपने उपरी वेतनमान में होते हुए भी पद अनुसार निचले क्रम में हो सकता है, पद विभाजन की सामान्य जानकारी के लिए छठे वेतन आयोग अनुसार तालिका सुविधार्थ नियमानुसार है-
क्रसं पद पे-बैंड ग्रेड पे
1. अखिल भारतीय सेवा
2. राज्य स्तरीय सेवा PB-4 37400-67000 8700, 8900, 9500, 10000
PB-3 15600-39100 5400, 6000, 6600, 6800, 7200, 7600, 8200
3. अधीनस्थ सेवा PB-2 9300-34800 3600, 4200, 4800
4. मंत्रालयिक सेवा PB-2 9300-34800 3600, 4200
PB-1 5200-20200 2400, 2800
5. चतुर्थ श्रेणी सेवा PB-1 5200-20200 1700, 1750, 1900, 2000
4.1.1 किसी अधिकारी/कर्मचारी का पदनाम केवल सेवा नियम और बजट में स्वीकृत पद के अनुरूप भरें। इसके लिए कार्यालय की लेखा शाखा या संस्थापन शाखा से पुष्टि की जा सकती है। यदि कार्यालय स्तर पर ही कार्य विभाजन के अनुसार कोई वर्गीकरण किया गया है, तो इसे लिखने की आवश्यकता नहीं है।
4.1.2 पदनाम मूलतः तीन भागों में भरा जायेगा –
पद का उपसर्ग (Prefix) जैसे - अतिरिक्त, सहायक, उप, कनिष्ठ, वरिष्ठ, अधीक्षण, अधिशाषी, मुख्य, प्रमुख आदि। पद का उपसर्ग वस्तुतः मूल पद का ही भाग होता है किन्तु एन्ट्री की सुविधा के लिए इन्हें अलग रखा गया है। यदि किसी अधिकारी/कर्मचारी का पदनाम ऐसे शब्दों से प्रारम्भ सर्वप्रथम ड्रॉपडाउन से उसका चयन कर लें। जिन पदनामों में ऐसे शब्द नहीं हैं, उनके चयन की आवश्यकता नहीं है। इसमें कतिपय उपसर्ग परक शब्दों को उपसर्ग की बजाय मूल पद में रखा गया है-
जहां ऐसे शब्द पद के उपसर्ग की बजाय क्षेत्र के रूप में प्रयुक्त हैं वहां उनका चयन न करें, जैसे- उपखण्ड अधिकारी (Subdivision Officer)
ऐसे पद उपसर्ग जो केवल किसी एक पद के लिए ही प्रयुक्त होते हैं, जैसे- नायब (Nayab), सहायक (Auxiliary) सामान्य/महा (General) निजी (Private/Personal)आदि। प्रयुक्त होते हैं, जैसे- नायब (Nayab), सहायक (Auxiliary) सामान्य/महा (General) निजी (Private/Personal)आदि।
पदों के उपसर्ग को भी दो भागों में बांटा गया है- प्रथम में अतिरिक्त, सहायक, उप, कनिष्ठ, वरिष्ठ जैसे पदानुक्रम वाले उपसर्ग में जबकि दूसरे में क्षेत्र आधारित उपसर्ग जैसे- ब्लॉक, जिला, संभाग, क्षेत्रीय आदि।
पदों के उपसर्ग को भी दो भागों में बांटा गया है- प्रथम में अतिरिक्त, सहायक, उप, कनिष्ठ, वरिष्ठ जैसे पदानुक्रम वाले उपसर्ग में जबकि दूसरे में क्षेत्र आधारित उपसर्ग जैसे- ब्लॉक, जिला, संभाग, क्षेत्रीय आदि।
मूल पद जैसे - आयुक्त, निदेशक, चिकित्साधिकारी, तहसीलदार आदि। कतिपय पद, जहां पुराने नाम परिवर्तित हो गए हैं, वहां सुविधा के लिए पुराने नामों को प्रत्यय के रूप में कोष्ठक में रखा गया हो सकता है, जैसे - लिपिक (Clerk) ग्रेड -।। के साथ कनिष्ठ लिपिक (LDC) लिपिक (Clerk) ग्रेड -। के साथ वरिष्ठ लिपिक (UDC) आदि। जो मूल पद व पद उपसर्ग दोनों हो सकते हैं, जैसे किसी शैक्षिक संस्था में प्रधानाचार्य (Principal) का पद जो प्रधान/प्रमुख सचिव (Principal Secretary) के पद से स्पष्टतः भिन्न है। इसी प्रकार सहायक भी उपसर्ग और मूल पद दोनों हो सकता है इसलिए इसे दोनों में रखा गया है।
पद का अनुभाग, शाखा या विशेषज्ञता जैसे- अभियन्ता के साथ सिविल/मैकेनिकल/इलेक्ट्रिकल आदि या चिकित्सक के साथ फिजीशियन/नेत्र रोग विशेषज्ञ/ई.एन.टी. आदि अथवा स्तर या क्षेत्राधिकार अनुसार प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ आदि। इसके अन्तर्गत पद के साथ अतिरिक्त रूप में जुडने वाले अनुभाग, शाखा या विशेषज्ञता का प्रत्यय (Suffix) के रूप में अंकन करें।
प्रत्यय (Suffix) को 2 भागों में वर्गीकृत किया गया है-
(i) Suffix-1 जिसमें अनुभाग, शाखा या विशेषज्ञता अंकित है।
(ii) Suffix-2 जिसमें विभाजन स्तर या क्षेत्राधिकार अनुसार डिविजन, कैटेगरी, क्लास या श्रेणी के रूप में होते हैं, जिन्हें एन्ट्री की सुविधा के लिए – I/II/III व ए, बी, सी के सामान्य रूप में रखा गया है।
कतिपय विशेषज्ञता वाले पदों जहां उनका मूल पद अलग से दिखता है किन्तु प्रसिद्वि के अनुसार कोई नामकरण बहुत प्रचलन में आ गया है उसे स्वतंत्र रखा गया है। जैसे - अधीक्षक पद सूची में होने के बावजूद पुलिस अधीक्षक को अलग से प्रदर्शित किया गया है।
नोटः- ये त्रिवर्गीय पदनाम केवल एन्ट्री के समय तीन भागों में दिखाई देंगे, पोर्टल पर अधिकारी/कर्मचारी के व्यू में या उसके परिचय पत्र पर संयुक्त रूप में एक पद के रूप में ही दिखाई देंगे।
4.1.3 अंग्रेजी में पदनाम भरते समय सक्षिप्त अक्षरों (Abbreviation) की बजाय पूरे नाम का प्रयोग करें। उदाहणार्थ ए.ई.एन. (A.EN.) के स्थान पर असिस्टेंट इंजीनियर (Assistant Engineer) या एम.ओ. (M.O.) स्थान पर मेडिकल ऑफिसर (Medical Officer) शब्द का प्रयोग करें।
4.1.4 पदनाम भरते समय उसकी हिन्दी एवं अंगे्रजी वर्तनी तथा अनुवाद का समुचित मिलान कर लें। इस संबंध में यह ध्यान रखें कि एक ही हिंदी या अंग्रेजी शब्द के अलग-अलग अनुवाद हो सकते हैं अतः उसे सर्वप्रथम सेवा-नियम के अनुसार रखें और यदि वहां द्विभाषीय रूप में उपलब्ध न हो तो विभाग में प्रचलित पदनाम का ही प्रयोग करें।
4.1.5 चतुर्थ श्रेणी सेवा के अन्तर्गत सेवा की श्रेणी बहुत अधिक होती है अतः सर्वप्रथम मूल पद में चतुर्थ श्रेणी लिखें और उसे प्रत्यय में उसके अन्तर्गत आने वाला पद जैसे- जमादार, दफ्तरी, जलधारी, साईकिल सवार आदि लिखें।
4.1.6 यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी एक पदनाम के अतिरिक्त पदेन (Ex Officio) या सह (cum) रूप में कोई अतिरिक्त पद धारित करता है जैसे - व्याख्याता सह प्रयोगशाला प्रभारी, निदेशक पदेन सदस्य सचिव आदि तो इन्हें दो संयुक्त पद मानते हुए एन्ट्री करें। जहां एक अतिरिक्त पद नियमानुसार केवल उसी पद का हिस्सा हैं जैसे - जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, उपखण्ड अधिकारी एवं उपखण्ड मजिस्ट्रेट, ग्राम सेवक पदेन पंचायत सचिव, एनालिस्ट कम प्रोग्रामर (उप निदेशक) आदि, वहां इन्हें मिश्रित पद के रूप में पहले से ही रखा गया है।
4.1.7 यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी के पदनाम में कोई त्रुटि है या वह पदनाम इस प्रकार की त्रिवर्गीय मैचिंग में नहीं बैठता, तो कार्यालयाध्यक्ष या विभागाध्यक्ष के माध्यम से आई.एच.आर.एम.एस. प्रभारी से संपर्क कर संशोधन की कार्यवाही कर लें।
4.1.8 चूंकि कार्मिक का वेतन आहरण एवं बजट स्वीकृति आई.एफ.एम.एस. से होती है और उसका पोर्टल आई.एच.आर.एम.एस. से पूर्व से क्रियाशील है, अतः आई.एच.आर.एम.एस. में नवीन रूप में पद अंकन व प्रदर्शन के साथ कार्मिक का आई.एच.आर.एम.एस. में अंकित पदनाम भी प्रदर्शित किया गया है।
5. आई.एच.आर.एम.एस.की भावी कार्ययोजना:-
5.1 इस वेबसाईट पर राजस्थान के विभिन्न राजकीय कर्मचारियों की सर्विस डाटा की एन्ट्री की रिपोर्ट प्रदर्शित की जानी है। वस्तुतः वेतन-भत्ते का भुगतान कार्य, राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि हेतु कटौती व उससे ऋण सम्बंधी कार्य, सेवा व सेवा पुस्तिका संबंधी प्रशासनिक कार्य, तथा पेंशन कार्य -- इन चारों कार्यो का अन्ततः एक ही डाटाबेस से पूर्णतः इन्टीग्रेटेड कर सिंगल साईन-आॅन से गवर्न किया जाएगा।
5.2 भविष्य में सेवाभिलेख, अवकाश स्वीकृति, प्रशिक्षण, वरिष्ठता सूची, विभागीय जांच, प्रतिनियुक्ति, स्थानान्तरण, सेवानिवृत्ति, पेंशन आदि की समस्त कार्यवाही हेतु चरणबद्ध रूप में प्रयुक्त किया जायेगा। इससे कार्मिकों को उनकी सेवा संबंधी सूचना में पारदर्शिता और उसकी सहज उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
5.3 भविष्य में इसके लिए मोबाइल एप भी विकसित किया जाएगा, जिससे सेवा संबंधी सूचना और भी सहजरूप में उपलब्ध होगी।
5.4 सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा अन्य कार्यालय प्रयोग हेतु विकसित किये जा रहे ई-ऑफिस सॉफ्टवेयर से इन्टीग्रेटेड होने से अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी सुविधा होगी।
6. आई.एच.आर.एम.एस. की विशेषताएं:-
6.1 किसी कार्मिक के सेवा अवधि एवं सेवा निवृति के उपरान्त की समस्त सूचना का एक ही पोर्टल पर इन्टीग्रेशन
6.2 आई.एफ.एम.एस. तथा एस.आई.पी.एफ. पोर्टल से लिंक्ड होने से डाटा एकीकृत होना
6.3 सेवा संबंधी समस्त प्रकार की प्रशासनिक आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए अलग-अलग मोड्यूल होना
6.4 डाटा के विश्लेषण हेतु अलग-अलग प्रकार की रिपोर्टिंग सुविधा का होना
6.5 विभिन्न कस्टमाईज्ड सूचनाओं को मोबाईल पर एस.एम.एस. के माध्यम से प्राप्त करने एवं भेजने की सुविधा होना
6.6 एक बार अधिकांश डाटा एन्टर होने पर अन्य प्रशासनिक कार्यों हेतु सरलता से आवेदन एवं निस्तारण
7. आई.एच.आर.एम.एस. में डाटा एन्ट्री की माँनीटरिंग हेतु सुविधा:-
इसके अतिरिक्त इस पोर्टल को गति प्रदान करने व समुचित और त्वरित उपयोग करने हेतु निम्न कार्य योजना बनाई गई है-
7.1 इस पोर्टल में भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अनेक एन्ट्री फील्ड विद्यमान हैं, जिन्हें अगर पूरी तरह से भरा जाये, तो अधिक समय लग सकता है, अतः समस्त डाटा को महत्वपूर्ण/प्राथमिकता आधारित डाटा (जिसे पोर्टल पर स्टार मार्क्ड रूप में प्रदर्शित किया गया है) तथा कम महत्वपूर्ण/प्राथमिकता आधारित डाटा में वर्गीकृत किया गया है। कर्मचारी/अधिकारी सर्वप्रथम प्रथम श्रेणी के डाटा एन्ट्री को वरीयता दें।
7.2 उक्त डाटा को भरे जाने हेतु कर्मचारी या अधिकारी स्वयं ही सक्षम हैं। अतः एक अभियान चलाकर और पोर्टल का व्यापक प्रचार-प्रसार कर विभागों एवं कर्मचारियों को इसका डाटा भरवाने हेतु निदेशित किया जाए।
7.3 किसी भी वेबसाइट को निरन्तर अद्यतन रखने हेतु उसे आवश्यक रूप से ट्रान्जेक्शन आधारित रखना होता है, अतः जैसे - अवकाश की स्वीकृति जारी किया जाना, एल.पी.सी. जारी किया जाना, सेवा पुस्तिका प्रमाणित किया जाना आदि को आवश्यक रूप से इसी पोर्टल से जारी होने पर मान्य किया जाएगा।
7.4 किसी भी वेबसाइट को निरन्तर अद्यतन रखने हेतु उसे आवश्यक रूप से ट्रान्जेक्शन आधारित रखना होता है, अतः जैसे - अवकाश की स्वीकृति जारी किया जाना, एल.पी.सी. जारी किया जाना, सेवा पुस्तिका प्रमाणित किया जाना आदि को आवश्यक रूप से इसी पोर्टल से जारी होने पर मान्य किया जाएगा।
7.5 प्रत्येक पद के लिए एक निर्धारित सेवा एवं काॅडर होता है जिसे मास्टर डाटा में समुचित रूप में सम्मिलित किया हुआ है यदि इसमें कोई सेवा उपलब्ध नहीं हो तो उसे जोडने हेतु सूचित कर दें।
7.6 कर्मचारियों के पदों के नाम में बहुत अधिक त्रुटि है जो सामान्यतः दो स्तर की है - एक ही पद का अलग-अलग नाम से दोहरीकरण तथा एक ही पद की अलग-अलग विशेषज्ञता या शाखाओं को अलग-अलग प्रदर्शित किया जाना। इसमें संशोधन आवश्यक है ताकि भविष्य में और त्रुटि न हो सके। पदनाम के साथ अलग से शाखा/ विशेषज्ञता/अनुभाग हेतु पृथक से एन्ट्री फील्ड रखा जायेगा। ताकि न तो किसी श्रेणी का दोहरीकरण हो और न ही कोई श्रेणी छूटे।
8. आई.एच.आर.एम.एस. के लाभ:-
इस प्रक्रिया के उपरान्त निम्न लाभ होंगे-

क. सेवावधि में लाभ-
स्थानान्तरण, पदोन्नति, विभागीय जांच, अवकाश, प्रशिक्षण, सेवा पुस्तिका, वरिष्ठता सूची, पे-स्लिप, वेतन कटौती, जी.ए. 55 आदि संबंधी प्रशासनिक कार्यों की सरल व बेहतर मानिटरिंग हो सकेगी।
कर्मचारी अपनी सेवा संबंधी सूचना से सीधे एवं सरल रूप से अवगत हो सकेंगे।
सेवा संबंधी प्रशासनिक कार्यों में बेहतर पारदर्शिता आएगी।
ख. सेवानिवृत्ति के उपरांत लाभ-
पेंशन विभाग का कार्य ऑटोमैटेड होने से समस्त डाटा स्वतः ही डिजिटाईज्ड और ऑनलाईन होता रहेगा।
अलग-अलग विभागों से सत्यापन एवं सूचना लिये जाने में होने वाले विलम्ब में कमी आयेगी।
प्रोविजनल पेंशन के प्रकरणों की समुचित माँनिटरिंग की जा सकेगी।
कर्मचारी अपने पेंशन की स्थिति से सीधे एवं सरल रूप से अवगत हो सकेंगे।
9. आई.एच.आर.एम.एस. से पृथक् रहने वाले विभाग:-
इस पोर्टल प्रथम चरण में केवल उन राजकीय कर्मचारियों के डाटा को डाला जाना है, जिनके वेतन का भुगतान आई.एफ.एम.एस. से किया जाता है।
10. आई.एच.आर.एम.एस. संबंधी अन्य सूचना एवं समस्या समाधान:-
यह पोर्टल कार्मिक विभाग के अधीन है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु शासन सचिवालय के कक्ष संख्या 7010, फूड बिल्डिंग में हेल्प डेस्क संचालित है जिसके दूरभाष संख्या 0141-5153222-21914 पर फोन से संपर्क कर अथवा स्वयं उपस्थित होकर सूचना प्राप्त की जा सकती है। आवश्यकतानुसार संयुक्त सचिव, कार्मिक (ग्रुप - बी ) विभाग से भी संपर्क किया जा सकता है।
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